संयुक्त राष्ट्र महासभा की 81वीं बैठक का हाई-लेवल सेशन इस समय न्यूयॉर्क में चल रहा है। दुनिया के कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष और सरकार प्रमुख इसमें हिस्सा ले रहे हैं, लेकिन इस बार कई बड़े देशों के शीर्ष नेता खुद न्यूयॉर्क नहीं पहुंचे। इनमें भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन जैसे बड़े नाम शामिल हैं।
भारत की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस बार संयुक्त राष्ट्र महासभा के हाई-लेवल सेशन में शामिल नहीं हो रहे हैं। उनकी जगह विदेश मंत्री एस. जयशंकर समेत भारतीय प्रतिनिधिमंडल भारत का पक्ष रख रहा है। प्रधानमंत्री के इस दौरे पर नहीं जाने की कोई विस्तृत आधिकारिक वजह सार्वजनिक नहीं की गई है। ऐसे में इसे किसी एक कारण से जोड़ना सही नहीं होगा।
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी इस बार UN महासभा में व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं हुए हैं। चीन की ओर से उपराष्ट्रपति को प्रतिनिधित्व के लिए भेजा गया है। वहीं रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी न्यूयॉर्क नहीं पहुंचे हैं। रूस का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव कर रहे हैं। पुतिन पिछले कुछ वर्षों से UN महासभा के हाई-लेवल सेशन में व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं होते रहे हैं।
इसके अलावा जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी समेत कुछ अन्य प्रमुख नेता भी इस बार महासभा में मौजूद नहीं हैं। कई देशों ने अपने विदेश मंत्रियों या दूसरे वरिष्ठ प्रतिनिधियों को भेजा है। फिलिस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास भी न्यूयॉर्क नहीं पहुंच सके और वीडियो के जरिए महासभा को संबोधित कर रहे हैं।
दरअसल, संयुक्त राष्ट्र महासभा में किसी देश के शीर्ष नेता का व्यक्तिगत रूप से शामिल होना अनिवार्य नहीं है। सदस्य देश अपनी ओर से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री या किसी अन्य वरिष्ठ प्रतिनिधि को भेज सकते हैं। इसलिए किसी नेता के UN महासभा में नहीं पहुंचने का मतलब यह जरूरी नहीं है कि वह देश संयुक्त राष्ट्र से दूरी बना रहा है। हर देश के फैसले के पीछे अलग-अलग कूटनीतिक, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां हो सकती हैं।
इस बार महासभा में गाजा और पश्चिम एशिया की स्थिति, यूक्रेन युद्ध, वैश्विक सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और संयुक्त राष्ट्र में सुधार जैसे मुद्दे प्रमुख चर्चा में हैं। ऐसे में बड़े नेताओं की गैर-मौजूदगी भी अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिहाज से चर्चा का विषय बनी हुई है।





