हरदीप पुरी का राज्यसभा टिकट कटा, फिर कितने दिन मंत्री रह सकते हैं?

भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए अपने 8 उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं। इस सूची में केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम नहीं है। इसके साथ ही उनके अगले राज्यसभा कार्यकाल को लेकर स्थिति साफ नहीं है। पुरी फिलहाल उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सांसद हैं और उनका मौजूदा कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को खत्म हो रहा है।

राज्यसभा का टिकट नहीं मिलने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या हरदीप पुरी सांसद नहीं रहते हुए भी केंद्र में पेट्रोलियम मंत्री बने रह सकते हैं। संविधान के अनुच्छेद 75(5) के तहत कोई व्यक्ति संसद के किसी भी सदन का सदस्य बने बिना भी मंत्री नियुक्त हो सकता है। हालांकि, ऐसी स्थिति में वह अधिकतम छह महीने तक ही मंत्री पद पर रह सकता है। इस अवधि के भीतर उसे लोकसभा या राज्यसभा का सदस्य बनना जरूरी होता है।

इसका मतलब है कि 25 नवंबर को राज्यसभा का कार्यकाल खत्म होने के बाद हरदीप पुरी तुरंत मंत्री पद से बाहर नहीं होंगे। अगर वह उस समय तक किसी सदन के सदस्य नहीं रहते हैं, तो उनके पास करीब छह महीने का समय होगा, जिसमें उन्हें संसद की सदस्यता हासिल करनी होगी। अगर छह महीने के भीतर वह सांसद नहीं बनते हैं, तो संवैधानिक नियमों के तहत उन्हें मंत्री पद छोड़ना पड़ेगा।

हरदीप पुरी को राज्यसभा का दोबारा टिकट नहीं मिलने के बाद अब यह भी चर्चा है कि उन्हें किसी दूसरी राज्यसभा सीट से संसद भेजा जा सकता है या फिर भविष्य में लोकसभा चुनाव के जरिए संसद में लाया जा सकता है। हालांकि, फिलहाल बीजेपी की ओर से उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

वहीं, राज्यसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने उत्तर प्रदेश की सभी 8 सीटों पर नए चेहरों को मौका दिया है। ऐसे में पुरी का नाम सूची से बाहर होना केंद्र सरकार में संभावित बदलाव की चर्चाओं को भी बढ़ा रहा है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि पार्टी हरदीप पुरी की संसद सदस्यता और उनके मंत्री पद को लेकर आगे क्या फैसला करती है।