फ्रांस में स्कूलों की खराब स्थिति और शिक्षा व्यवस्था को लेकर चल रहे छात्र प्रदर्शनों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान से विवाद बढ़ गया है। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर कहा कि फ्रांस में जो कुछ हो रहा है, वह केवल स्कूलों का मुद्दा नहीं है, बल्कि बड़े पैमाने पर हो रहे प्रवासन से जुड़ा है। उन्होंने दावा किया कि इस्लाम फ्रांस पर कब्जा करना चाहता है। हालांकि, ट्रंप ने अपने इस दावे के समर्थन में कोई सबूत पेश नहीं किया।
दरअसल, फ्रांस में सितंबर से हाई स्कूल के छात्र बेहतर शिक्षा व्यवस्था की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्रों की मुख्य शिकायतें स्कूलों में शिक्षकों की कमी, ज्यादा संख्या में छात्रों वाली कक्षाएं, खराब स्कूल इमारतें, जरूरी सुविधाओं की कमी और शिक्षा के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं मिलने से जुड़ी हैं। यह आंदोलन धीरे-धीरे देश के कई हिस्सों में फैल गया और इसमें शिक्षक, अभिभावक और अन्य संगठन भी शामिल हो गए।
6 अक्टूबर को पूरे फ्रांस में करीब 2.5 लाख लोगों के प्रदर्शन में शामिल होने की जानकारी सामने आई। कई जगह प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे, लेकिन कुछ शहरों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प भी हुई। पुलिस ने आंसू गैस और पानी की बौछार का इस्तेमाल किया। फ्रांस के गृह मंत्रालय के मुताबिक, उस दिन 488 लोगों को गिरफ्तार किया गया और 43 सुरक्षाकर्मी घायल हुए।
ट्रंप के बयान पर फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बारो ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि फ्रांस को अपने देश में हो रही घटनाओं की अपनी कहानी खुद बतानी चाहिए और दूसरे देशों को इसकी व्याख्या करने का मौका नहीं देना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि फ्रांस के अंदर चल रहे आंदोलन को लेकर अलग-अलग देश अपने-अपने नजरिए से बात कर रहे हैं।
फिलहाल, छात्र आंदोलन और इस्लाम या किसी धार्मिक एजेंडे के बीच कोई स्थापित संबंध सामने नहीं आया है। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें शिक्षा व्यवस्था में सुधार, शिक्षकों की कमी दूर करना और स्कूलों की खराब स्थिति को ठीक करना हैं। ऐसे में ट्रंप के बयान ने फ्रांस के शिक्षा संकट को प्रवासन और धर्म से जोड़कर एक नई राजनीतिक बहस जरूर शुरू कर दी है।





