ट्रंप के टैरिफ से चीन को राहत, रूसी तेल विवाद पर हरदीप पुरी बोले- हमारे पास प्लान-बी तैयार

अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड ट्रूस यानी व्यापारिक समझौते की अवधि बढ़ने से चीन को फिलहाल अमेरिकी टैरिफ के मोर्चे पर राहत मिल गई है। वहीं, रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर अमेरिकी दबाव बना हुआ है। इसी बीच पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने साफ किया है कि भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था यानी प्लान-बी तैयार कर रखा है।

दरअसल, अमेरिका और चीन ने अपने ‘बुसान समझौते’ की अवधि 10 नवंबर 2026 से बढ़ाकर 10 जनवरी 2027 तक कर दी है। इस दौरान दोनों देशों के बीच नए अतिरिक्त टैरिफ लगाने पर रोक रहेगी। चीन और भारत दोनों ही रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदते हैं, लेकिन इस समझौते से चीन को फिलहाल अमेरिकी टैरिफ के दबाव से कुछ राहत मिली है। हालांकि, अमेरिकी कानून के तहत रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का अधिकार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को मिला है। यह टैरिफ भारत पर अपने आप लागू नहीं हुआ है, बल्कि इसका फैसला अमेरिकी प्रशासन को करना होगा।

भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता ऊर्जा सुरक्षा को लेकर है। रूस लंबे समय से भारत के प्रमुख कच्चे तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है। हालांकि, हाल के महीनों में भारत ने रूसी तेल पर अपनी निर्भरता कुछ कम की है और मध्य-पूर्व समेत दूसरे स्रोतों से तेल खरीद बढ़ाई है। अगस्त 2026 में भारत का रूस से तेल आयात करीब 16.5 प्रतिशत घटकर लगभग 21 लाख बैरल प्रतिदिन रहा, जबकि सितंबर में इसके और कम होने का अनुमान है।

हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, आपूर्ति मार्गों में रुकावट और ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत ने पर्याप्त पेट्रोलियम आपूर्ति सुनिश्चित करने की तैयारी की है। सरकार का जोर तेल की सप्लाई को एक ही देश पर निर्भर रखने के बजाय अलग-अलग स्रोतों से हासिल करने पर है। भारत पहले ही ऊर्जा आपूर्ति में विविधता बढ़ाने की दिशा में कदम उठा रहा है।ऐसे में आने वाले समय में भारत के सामने दोहरी चुनौती है—एक तरफ अमेरिकी टैरिफ का दबाव और दूसरी तरफ देश की ऊर्जा जरूरतों को किफायती कीमत पर पूरा करना। सरकार का कहना है कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच भारत अपने आर्थिक हितों और ऊर्जा सुरक्षा दोनों को ध्यान में रखते हुए जरूरी कदम उठाएगा।