भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने वैश्विक अस्थिरता के बीच आने वाले समय में बड़े खाद्य संकट की आशंका जताई है। न्यूयॉर्क में एशिया सोसाइटी के एक कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने दुनिया के सामने मौजूद आपस में जुड़े संकटों को रेखांकित किया और कहा कि खाद्य, ईंधन, उर्वरक और वित्त से जुड़ी समस्याएं वैश्विक अर्थव्यवस्था और विकासशील देशों पर दबाव बढ़ा रही हैं।
जयशंकर ने मौजूदा परिस्थितियों को ‘4F’ संकट के रूप में समझाया, जिसमें Food यानी खाद्य, Fuel यानी ईंधन, Fertiliser यानी उर्वरक और Finance यानी वित्त शामिल हैं। उनके मुताबिक, इन क्षेत्रों में व्यवधान एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और किसी एक क्षेत्र का संकट दूसरे क्षेत्रों पर भी असर डाल सकता है। इससे खास तौर पर विकासशील देशों की खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
जयशंकर के बयान ऐसे समय आए हैं जब पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान ने वैश्विक बाजारों पर दबाव बढ़ाया है। भारत पहले ही ऊर्जा सुरक्षा और रूसी तेल से जुड़े अमेरिकी प्रतिबंधों को लेकर अपनी चिंताएं अमेरिका के सामने रख चुका है। 23 सितंबर को जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ बैठक में नए रूस-ईरान प्रतिबंध कानून के भारत पर संभावित प्रभावों को लेकर चिंता दोहराई थी।
अमेरिका के रवैये पर सवाल उठाते हुए जयशंकर ने भारत की चिंताओं को समझने में अमेरिकी पक्ष की ‘संवेदनशीलता की कमी’ का भी जिक्र किया। यह टिप्पणी भारत की उन चिंताओं के संदर्भ में सामने आई है, जिनमें पाकिस्तान से होने वाले आतंकवाद और उससे जुड़े सुरक्षा मुद्दे भी शामिल हैं। हालिया बयान में जयशंकर ने कहा कि भारत की इन चिंताओं के प्रति अमेरिकी संवेदनशीलता की कमी द्विपक्षीय संबंधों को प्रभावित कर रही है। यह उनका आकलन है, जबकि दोनों देशों के बीच सुरक्षा और रक्षा सहयोग भी जारी है।
खाद्य सुरक्षा को लेकर जयशंकर की चिंता का संबंध केवल भारत से नहीं, बल्कि व्यापक ग्लोबल साउथ से भी है। इससे पहले संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान उन्होंने कहा था कि विकासशील देश जलवायु परिवर्तन, संघर्ष, ऊर्जा संकट और आर्थिक अस्थिरता जैसी चुनौतियों से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं, जबकि वैश्विक निर्णय लेने वाली संस्थाओं में उनका प्रतिनिधित्व अपेक्षाकृत कम है।
जयशंकर ने ऐसे समय अंतरराष्ट्रीय सहयोग और अधिक समन्वित प्रतिक्रिया की जरूरत पर जोर दिया है, जब खाद्य और ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाएं भू-राजनीतिक संघर्षों से प्रभावित हो रही हैं। भारत की ओर से ग्लोबल साउथ के देशों के बीच सहयोग बढ़ाने और खाद्य तथा ऊर्जा सुरक्षा को वैश्विक प्राथमिकता बनाने की बात लगातार उठाई जा रही है।





