विदेश मंत्री एस. जयशंकर की घाना यात्रा के दौरान भारत और घाना के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर जोर दिया गया। दोनों देशों ने व्यापार, निवेश, स्वास्थ्य, शिक्षा, डिजिटल तकनीक, कृषि और विकास सहयोग जैसे कई क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने पर चर्चा की। इस यात्रा को भारत की अफ्रीका नीति और घाना के साथ बढ़ते रणनीतिक संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
घाना ने BRICS में शामिल होने की अपनी इच्छा को भी स्पष्ट किया है। घाना की ओर से BRICS में शामिल होने के लिए रुचि जताई गई है। भारत ने इस प्रक्रिया में घाना की भागीदारी का स्वागत किया है। BRICS के विस्तार के बीच घाना का यह रुख भारत और अफ्रीकी देशों के बीच बढ़ते सहयोग को भी दर्शाता है।
जयशंकर की यात्रा के दौरान दोनों देशों ने आर्थिक और कारोबारी संबंधों को बढ़ाने पर भी चर्चा की। भारत और घाना के बीच व्यापार को और बढ़ाने के साथ-साथ भारतीय कंपनियों के लिए घाना में निवेश के अवसरों पर जोर दिया गया। स्वास्थ्य और दवा के क्षेत्र में भारत की विशेषज्ञता से घाना को लाभ पहुंचाने की संभावनाओं पर भी बातचीत हुई।
इसके अलावा डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा, कृषि और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। भारत लंबे समय से अफ्रीकी देशों के साथ विकास साझेदारी को मजबूत कर रहा है और घाना के साथ संबंध इसी नीति का हिस्सा हैं। दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ने से व्यापार, तकनीक और विकास के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
जयशंकर की घाना यात्रा से यह संदेश भी मिला कि भारत अफ्रीका के साथ अपने संबंधों को केवल व्यापार तक सीमित नहीं रखना चाहता, बल्कि रणनीतिक और विकासात्मक साझेदारी को भी आगे बढ़ा रहा है। घाना का BRICS में शामिल होने की तैयारी करना इस बदलते वैश्विक समीकरण में भारत-अफ्रीका सहयोग के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।





