अभिजीत दीपके के तिरंगा मार्च पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी, कहा- सभी लोग समझदारी से काम लें

दिल्ली के कनॉट प्लेस (CP) में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके के तिरंगा मार्च को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को अदालत ने प्रदर्शन के दौरान व्यापारियों के कारोबार पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर चिंता जताई। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने उम्मीद जताई कि सभी लोग समझदारी से काम लेंगे और ऐसा कोई कदम नहीं उठाएंगे, जिससे आम लोगों को परेशानी हो।

दरअसल, अभिजीत दीपके ने 16 अक्टूबर को शाम 5 बजे कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में ‘लहरा दो तिरंगा’ कार्यक्रम आयोजित करने का ऐलान किया था। यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध जताने और CJP के सदस्यों आशुतोष रांका तथा सौरव दास के समर्थन में आयोजित किया जाना था। दोनों को 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर तिरंगा लेकर नारेबाजी करने के मामले में हिरासत में लिया गया था। बाद में उन्हें गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

सुनवाई के दौरान व्यापारियों के संभावित नुकसान का मुद्दा भी उठाया गया। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने छोटे दुकानदारों की रोजी-रोटी का जिक्र करते हुए कहा कि उनके कारोबार पर असर पड़ने से उनके परिवारों को भी परेशानी हो सकती है। वहीं, जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने टिप्पणी की कि एक व्यक्ति प्रदर्शन करना चाहता है, दूसरा मूंगफली बेचकर अपनी आजीविका चलाना चाहता है और तीसरा कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी निभाता है। ऐसे में सभी के हितों के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है।

इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने तिरंगा मार्च पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। हालांकि, नई दिल्ली नगर परिषद (NDMC) ने प्रशासनिक कारणों का हवाला देते हुए 16 और 17 अक्टूबर को कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क को आम लोगों के लिए बंद रखने का आदेश दिया। कार्यक्रम को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की।

सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल कोई आदेश देने से इनकार करते हुए मामले में आगे विचार करने की बात कही। अदालत ने संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर व्यापारियों के नुकसान और संबंधित प्रतिबंधों के मुद्दे पर विचार किया जा सकता है। मामले को 26 या 27 अक्टूबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किए जाने की बात कही गई।